मंगलवार, 7 जुलाई 2009

कविता

मोबाइल
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माचिस की दो खाली डिब्बियों के बीच
एक लंबा धागा बाँध कर
दो छोर पर खड़े हो जाते है दो बच्चे

पहले छोर से
बच्चा माचिस की डिब्बी को
कान से सटाकर कहता है - हलो
दूसरे छोर से दूसरा बच्चा
उस ही अंदाज में बोलता है
हाँ - कौन बोल रहा है

फिर बहुत देर तक चलता रहता है संवाद
दोनों बच्चे महसूस करते है कि
वास्तव में उनको आवाज
एक दूसरे तक बीच के धागे के
माध्यम से ही आ रही है

संवाद करते करते दोनों बच्चे
बड़े होजाते है
दोनों बच्चों कीजेब में
माचिस की खाली डिब्बियों की जगह
रखें है मोबाइल

आज भी दोनों छोरों से
देर तक चलता रहता है संवाद
किंतु अब दोनों छोरों के
बीच का धागा टूट गया है
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