सोमवार, 28 नवंबर 2016

कविता

कविता 
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रास्ते 
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उन्ही  रास्तों  पर  चला  मैं 
जो  थे  लंबे  और  ऊबड़ - खाबड़ 
शार्ट - कट  नहीं  ढूंढें   मैंने

अभी  मंज़िल  दूर  थी 
चल  ही  रहा  था  मैं  

कुछ  लोग  लौटते  हुए  मिले
सही  राह  की  तलाश  में 
बहुत   कम   थे 

अधिकांश  शार्ट - कट  से 
पहुँच   गए  थे  गन्तव्य  तक 
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