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शुक्रवार, 23 अप्रैल 2010

कविता 
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कला में  गणित 
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मैं गणित में  बहुत कमजोर था 
यदि मेरी गणित अच्छी  होती 
शायद मैं  इन्जीनीयर होता 

गणित  में अनुतीर्ण  होते रहने पर  
मैं कला  वर्ग में आगया 
विश्वविद्यालय की परीक्षाओं  में
उतीर्ण  होता चला गया 
मुझे  मास्टर आफ  आर्ट्स  की
उपाधि भी मिल गई 
पर गणित में कमजोर ही रहा 


बीज गणित एवं रेखा गणित से 
मैंने छुटकारा  पा लिया पर 
जीवन के गणित में फंस गया 


संबंधों  में गणित 
मित्रों में गणित 
साहित्य  में गणित 
कला में गणित 


सम्मान में गणित 
अपमान में गणित 
पुरस्कार में गणित 
तिरस्कार में गणित 


मेरा सोचना गलत था 
गणित अच्छी होने पर 
इन्जीनीयर  ही बना जा सकता है 
सच तो ये है कि 
कुछ भी  बनने के लिए 
गणित अच्छी होना  जरूरी  है.
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2 टिप्पणियाँ:

  1. काश गणित पढ़ लिये होते तो ये गणित तो न पढना पड़ता

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  2. बेनामी9 मई 2010 11:32 pm

    jeevan ke ganit ko samjhna vakai main mushkil hai. badiya kavita

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं