बुधवार, 24 जून 2009

कविता

बचे हुए दिन
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कितने दिन बचेगें
बचे हुए दिन
एक दिन बीत ही जायेंगे

बचे हुए दिनों में
करने को है अनेक काम
लिखना चाहता हूँ
ढेर सारी कवितायें

अभी आंखों में बचे है
कई स्वप्न
समय कम है
ताबीर के लिए

अभी जानाहै दूर
बची है थकान
समय कम है
ठहर जाने के लिए

तेजी से बीतते हुए दिन
जल्दी ही फिसल जायेगें
हथेलियों के बीच से

कितने दिन बचेगें
बचे हुए दिन
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